
हम आंख लगाए बैठे हैं
वो आंख गड़ाए बैंठे हैं
हम आस लगाए बैठे है
वो घात लगाए बैठे हैं
हम दीप जलाए बैठे हैं
वो आग जलाए बैठे हैं
हमे है इंतजार उनका
उन्हें भी है, इंतजार उनका
देखना है असर, हमारा लाएगा रंग
या नापाक इरादे उनके
विश्वास हमारा रहेगा जिंदा, या
उठ जाएगा विश्वास हमारा।
(मध्य प्रदेश में कटनी के पास ही एक गांव में मेरा दोस्त रहता है। जब भी मेरा वहां जाना होता तो उसकी दीदी की की ये व्यथा हर रोज शाम ढलत ही शुरू हो जाती थी कि उनके पति जो कि इमानदार हैं आज घर आएंगे भी या नहीं। रो़ड कॉन्ट्रैक्टरों के खिलाफ उन्होंने आरोप लगाया था। जब से ये केस चल रहा था तो दीदी की ये धुक धुकी बनी रहती थी। दीदी की उसी उधेड़बुन पर चंद पंक्तियां।)आपका अपना
नीतीश राज