
मेरा कोई आज मिला
कुछ इस तरह मुझसे
जैसे,
डूबती नवज मिली हो
जिंदगी से।
कुछ इस तरह मुझसे
जैसे,
डूबती नवज मिली हो
जिंदगी से।
लगता है जैसे
बात कल ही की हो।
उसे मनाने के लिए
जिस्म से पहले
हाथ बढ़ाया,
उस रिश्ते की डोर को
थामने के लिए,
जो कुछ दिन पहले
हाथ से छूट गई थी।
वो भी तो चाहती थी
आगे आकर थाम लूं
उसको अपनी बाहों में।
अकेली गुजारी शामों का
हिसाब दूं।
हर उस पल की बात करूं
जब मैं अकेला था
और,
जब हम साथ थे
ख्वाबों में।
हर उस पल की
बात करूं
जो अकेला था
सिर्फ मेरी तरह
अपने में सिमटा हुआ
उसके आने से पहले।
आपका अपना
नीतीश राज
नीतीश राज